सफलता चाहिए तो अपनाइएं ये पांच मूल मंत्र

हर कोई अपने करियर में सफल होना चाहता है। यह बात और है कि सफल होने की तमन्ना रखने वाले लोगों में से बहुत से लोग सार्थक प्रयास नहीं करते हैं। हम आपको बताना चाहते हैं कि सफलता के पांच मूल मंत्र जिन्हें अपना कर आप अपनी जिंदगी में सफलता की नई उचाइंयां पा सकते हैं।
काम को टालें नहीं
कार्य टालने की आदत आपको असफलता की राह पर ले जाती है। किसी कार्य को करने के लिए अगर किसी से विचार-विमर्श करना जरूरी है और इस कारण से देर हो रही है, तब तो ठीक है अन्यथा उसे समय पर पूरा करने की आदत डालें। एक प्राइवेट कंपनी में सीनियर पोस्ट पर कार्य करने वाली किरण शर्मा कहती हैं कि अगर किसी काम को करने में आपको दिक्कत महसूस हो रही है तो अपने साथियों या सीनियर्स से इस संदर्भ में बात जरूर कर लें, लेकिन कार्य को टालने की आदत न डालें।
व्यवस्थित तरीका
यह दुनिया दो प्रकार के लोगों की है। एक वे जो हर कार्य को पहले से सोच-समझकर और नियोजित तरीके से पूरा करते हैं। दूसरे वे जो अपने कार्य को पूरा करने के लिए किसी प्रकार की योजना नहीं बनाते हैं और बिना किसी सोच-विचार के ही अपने काम को अंजाम देने में लग जाते हैं। ऐसे लोगों की जिंदगी हमेशा अव्यवस्थित रहती है। इसलिए कोई भी काम करने से पहले उसके बारे में पूरी तरह से सोच-विचार कर लें। साथ ही सभी कार्र्यों को किसी डायरी या प्लानर पर नोट अवश्य कर लें। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कोई भी काम छूटेगा नहीं। यही नहीं आपके सारे काम बहुत आराम से और सही ढंग से पूरे हो सकेंगे।
सलाह लें
किसी कार्य को करने के संदर्भ में अपने सहयोगियों या सीनियर्स से सलाह लेने में अगर आप संकोच करती हैं तो आपका यह रवैया ठीक नहीं कहलाएगा। अगर किसी कार्य के संदर्भ में आपको कोई बात समझ नहीं आ रही है या आपके मन में दुविधा उत्पन्न हो रही है तो बेहतर यही होगा कि आप अपने साथियों से सलाह मशविरा कर सकती हैं। हालांकि इस संदर्भ में यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि सलाह हमेशा ऐसे लोगों से लें जो सही सलाह देते हों। नकारात्मक विचारों वाले लोगों से सलाह लेने से बचें।
किसी को दोष न दें
समय का दुरुपयोग करना या अपने काम में रुचि न लेना असफलता की राह पर ले जाने वाले कारक हैं। असफल लोगों की यह खास आदत होती है कि वे अपनी असफलता का दोष हमेशा दूसरों पर मढने लगते हैं। कॅरियर काउंसलर्स का कहना है कि किसी भी कार्य में गलती होने या असफल होने पर उसका दोषारोपण दूसरों पर करना ठीक नहीं होता है। कारण, किसी न किसी दिन आपकी पोल खुल ही जाएगी, तब आपके पास किसी भी प्रकार का कोई बहाना नहीं होगा। इसलिए अगर किसी कार्य को पूरा करने में आपसे कोई गलती हुई है तो उसे स्वीकार करने में कोई हर्ज नहीं है।
सकारात्मक सोच
अगर आप हमेशा नकारात्मक सोचती रहती हैं तो अपनी सोच की दिशा बदलें और हर चीज के बारे में सकारात्मक सोचें। अपने हर दिन की शुरुआत इस सोच के साथ करें कि मुझे अपने कार्य में सफलता अवश्य मिलेगी और मैं अपने लिए निर्धारित कार्र्यों को ईमानदारी से पूरा करूंगी। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि सकारात्मक सोच रखने से आपकी जिंदगी खुशहाल रहती है और आप हमेशा हर हाल में खुश रह सकती हैं। यही नहीं सकारात्मक सोच का असर यह होता है कि विपरीत स्थितियों में भी आप सही निर्णय ले पाती हैं।