सब कुछ छोड़कर रजाई में घुस जाने को जी चाहता है…

– श्रीगंगानगर में सोशल मीडिया पर ठंड आधारित मैसेजेज की बाढ़
– मैसेज पढ़कर ठिठुरना भूल खिलखिला रहे लोग
श्रीगंगानगर। ‘मत ढूंढना मुझे इस जहां की तन्हाई में, ठण्ड बहुत है मैं हूँ अपनी रजाई मेंÓ, ‘ठण्ड में वादा नहीं करते कि दोस्ती निभायेंगे जरूरत पड़ी तो सब कुछ ले लो पर रजाई न दे पायेंगेÓ, ‘उसको चाहा पर इजहार करना नहीं आया कट गयी उम्र हमें प्यार करना नहीं आया उसने कुछ मांगा भी तो मांगी रजाई और हमें इनकार करना नहीं आयाÓ, ‘ना मुस्कुराने को जी चाहता है ना कुछ खाने-पीने को जी चाहता है अब ठंड बर्दाश्त नहीं होती सब कुछ छोड़कर रजाई में घुस जाने को जी चाहता हैÓ … इस तरह की शेर-ओ-शायरी की इन दिनों सोशल मीडिया पर बाढ़ सी आ गई है। कड़ाके की ठंड पडऩा शुरू होने के बाद जहां लोग कंपकंपा रहे हैं, वहीं लोगों ने इसे मनोरंजन का जरिया भी बना लिया है।
पिछले चार-पांच दिन से फेसबुक, व्हाट्स एप और ट्विटर आदि पर जितने भी चुटकले, शे’र और विचार साझा किए जा रहे हैं, उनमें से ज्यादातर सर्दी पर ही आधारित हैं। श्रीगंगानगर में लोग मूंगफली खाते और गर्म चाय की चुस्कियां लेते हुए मोबाइल पर ठंड पर बने मैसेजेज को पढ़कर प्रफुल्लित हो रहे हैं, वहीं इन्हें आगे मित्रों, परिचितों और रिश्तेदारों को भेजकर उन्हें गुदगुदा रहे हैं।
मोबाइल फोन पर इन दिनों ‘आज तो इतनी ठंड है कि कोई पानी वाली पिस्तौल दिखाकर भी लूट सकता है…समझ में नही आता सारी रात गुजर जाती है रजाई में हवा किधर से घुस जाती है…हर कामयाबी पर आपका नाम हो आपके हर क़दम पर सफलता का मुकाम हो ध्यान रखना, ठण्ड आ गयी है मैं नहीं चाहता आपको जुकाम हो…ठण्ड का बहाना है व्हाट्सएप करके आपको सताना है मौसम भी दीवाना है आप भी दो-चार व्हाट्सएप कर दो क्या नेट पैक का बैलेंस बचा के नया स्वेटर लाना है…जैसे मैसेज मिलने पर हर व्यक्ति ठिठुरना भूल खिलखिलाने पर मजबूर हो जाता है।
लोग सुबह उठने के साथ ही ठंड पर बने मैसेजेज भेजना शुरू करते हैं और देर रात तक यही सिलसिला चलता है। सभी व्हाट्स एप गु्रपों में भी सर्दी जोक्स, शेर-ओ-शायरी, फोटो, कार्टून आदि की बाढ़ सी आई हुई है।
ऐसे-ऐसे मैसेज
कितना दर्द है दिल में दिखाया नहीं जाता
गंभीर है किस्सा सुनाया नहीं जाता
वीडियो कॉल मत कर पगली
रजाई में से मुंह निकाला नहीं जाता
……………..
क्यूं किसी की यादों को सोच कर रोया जाए
क्यूं किसी के ख्यालों में यूं खोया जाए
बाहर मौसम बहुत खऱाब है
क्यूं न रजाई तानकर सोया जाए
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ठंड में ठिठुरते देख कर
दो महिलाओं को जब कंबल देने की कोशिश की गई
तो वो गुस्सा कर बोलीं-
जाइए काम करिए अपना, हम गरीब नहीं हैं
हम तो शादी में जा रहे हैं।
लड़की रो-रो कर लड़के से कह रही है
हाथ छोड़ो
मेरी नाक बह रही है
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अपना समझो या बेगाना
हमारा आपका है रिश्ता पुराना
इसलिए मेरा फर्ज है आपको बताना
ठंड आ गयी है
कृपया रोज मत नहाना