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समेट रहे आशियानों का मलबा

– कोई निकाल रहा खिड़की दरवाजे, तो कोई लोहे के गार्डर
श्रीगंगानगर। सपने पूरे करने के लिए कभी बनाया गया आशियाना अब मलबे के रूप में बखरा पड़ा है।
कब्जे हटाने की कार्रवाई के बाद जस्सासिंह रामगढिय़ा मार्ग से आशियानों का यह मलबा लोग समेट रहे हैं। मलबे में भी भविष्य के आशियाने की उम्मीदों की तलाश की जा रही है। इसी तलाश के साथ कोई खिड़की-दरवाजे निकाल रहा है तो कोई लोहे के गार्डर-सरिये। अभियान के बाद बसंती चौक से लेकर चावला कॉलोनी की अन्तिम गली तक व सामने हरदीप सिंह कॉलोनी की कॉर्नर तक मलबा ही मलबा नजर आ रहा है। मलबा देखकर पता नहीं चलता कि किस मकान का कौनसा हिस्सा इस मलबे में शामिल है। लोग तो बस मलबा समेटने में लगे हैं। किसी ने जेसीबी बुला रखी है तो कोई खुद ही मलबा समेटने में जुटा है। ट्रेक्टर-ट्रॉलियों से भी मलबे का उठाव किया जा रहा है।
खुद तोड़ रहा अपना मकान
जस्सासिंह रामगढिय़ा मार्ग पर कल एक व्यक्ति का मकान अतिक्रमण होने के बावजूद नहीं तोड़ा जा सका था। इस मकान के आंगन में गुरुग्रंथ साहिब रखे होने के कारण यूआईटी को बैकफुट पर आना पड़ा था। मकान खाली कर तोडऩे के लिए भवन मालिक को एक दिन का समय दिया गया था। यह समयावधि पूरी होने के साथ ही मंगलवार सुबह मकान मालिक ने लेबर बुलाकर अतिक्रमण हटाना शुरू कर दिया।