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सरकारी डॉक्टर्स तीन घंटे से अधिक नहीं कर सकेंगे प्राइवेट प्रैक्टिस

इंदौर। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के सरकारी डॉक्टर्स की प्राइवेट प्रैक्टिस के नियम सख्त कर दिए हैं। नियमों के आधार पर कोई भी सरकारी डॉक्टर किसी निजी नर्सिंग होम, क्लीनिक, पैथोलॉजी लैब में सेवाएं नहीं दे सकता। अपनी खुद की क्लीनिक में जरूर बैठने की छूट है, वह भी सिर्फ तीन घंटे। इतना ही नहीं, निजी प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर को डायरी मेंटेन करनी होगी कि प्रैक्टिस के दौरान कितने मरीजों का इलाज किया, उन सबसे कितनी फीस ली और इसकी रसीद भी देनी है। प्रैक्टिस करने वाले को क्लीनिक के बाहर शुल्क, इलाज का प्रकार भी लिखना होगा। डॉक्टर्स को इन नियमों के आधार पर अपने-अपने विभाग प्रमुख को शपथ-पत्र देना होगा। साल 2017 फरवरी में ये आदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद जारी किया गया था, जिसे इस बार और सख्ती से जारी करने के साथ-साथ अमल में लाने का उल्लेख है।