सरकार-3

कयास लगाए जा रहे थे कि सरकार 3 राम गोपाल वर्मा की कमबैक फिल्म हो सकती है। पर अफसोस, ऐसा हो नहीं पाया। फिल्म एक औसत राजनैतिक ड्रामा बनकर रह गई है। मनोज वाजपेयी छोटे से किरदार में अमिताभ बच्चन पर भारी पड़े हैं। यामी गौतम इस फिल्म में क्या कर रही हैं, अगर यह पता लग जाए, तो हमें भी बता दीजिएगा।
जब किसी फिल्म से ‘सस्पेंस, के तार जुड़े हों, तो करोड़ों दर्शक उसकी रिलीज से पहले ही उसे सुलझाने के लिए अपने दिमाग के घोड़े दौड़ा रहे होते हैं। ऐसी फिल्मों के निर्देशक को सफल उसी सूरत में माना जाता है, जब उसका दिमाग उन करो ड़ों दर्शकों की सोच से परे एक ऐसा क्लाइमैक्स तलाश ले, जिसे सुनकर एक पल के लिए ही सही, पर झटका लगे। अफसोस कि रामगोपाल वर्मा ‘सरकार 3, में वहां तक नहीं पहुंच पाते।
इसका क्लाइमैक्स क्या होने वाला है, इसका अंदाजा एक आम दर्शक भी आसानी से लगा सकता है। साल 2005 में रिलीज सरकार से भी ज्यादा! इसके किरदारों की ग्रैविटी इतनी थी जिसके चलते माना जा रहा था कि सरकार 3 निर्देशक राम गोपाल वर्मा की कमबैक फिल्म हो सकती है। पर ऐसा हो नहीं पाया। फिल्म में सरकार यानी मुख्यमंत्री सुभाष नागरे (अमिताभ बच्चन) की एंट्री होती है एक सभा से, जिसमें वह अपने चिर-परिचित अंदाज में अपना हाथ लहराते हैं।
एक दिन अचानक उनका पोता चीकू (अमित साध) उनके पास आता है और कहता है कि वह उनके साथ काम करना चाहता है। सरकार के अपने विश्वासपात्रों पराग त्यागी (रमन गुरु) और गोकुल (रोनित रॉय) को यह बात खटकती है कि अब उनका महत्व कम हो जाएगा। सरकार के दुश्मन गोकुल को तोड़कर अपनी तरफ मिलाने का झांसा देते हैं। इस बीच गोकुल सरकार से कहता है कि चीकू उन्हें बरबाद के मकसद से आया है। चीकू की प्रेमिका अनु (यामी गौतम) को लगता है कि उसके पिता की हत्या सरकार ने की थी जिस वजह से वह भी उनसे बदला लेना चाहती है। मनोज वाजपेई एक दूसरी पार्टी के नेता हैं जो सरकार की बर्बादी में भड़काऊ भाषण देता रहता है।
ऐसे माहौल में कौन सरकार का दोस्त है और कौन दुश्मन? और जीत किसकी होगी, इसी दिशा में बढ़ती है यह फिल्म। गलत कलाकारों का चयन किसी फिल्म को कितना नुकसान पहुंचा सकता है, यह इस फिल्म में यामी गौतम और अमित साध के किरदार देखकर समझ आ जाता है। फिल्म में सरकार राज के किरदारों शंकर(अभिषेक बच्चन) और विष्णु (के के मेनन) का कई बार जिक्र होता है पर ऐश्वर्य राय का कोई जिक्र नहीं होता, जो कुछ अजीब लगता है। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर कुछ ज्यादा ही लाउड है। 90 के दशक में यह पसंद किया जाता था, पर अब दर्शकों की पसंद बदल चुकी है। फिल्म की कहानी इसकी सबसे कमजोर कड़ी है। संवाद भी औसत हैं। मनोज वाजपेयी छोटे से किरदार में अमिताभ बच्चन पर भारी पड़े हैं। यामी गौतम इस फिल्म में क्या कर रही हैं, अगर यह पता लग जाए, तो हमें भी बता दीजिएगा।