सरदार पटेल न होते तो देश के बीचों-बीच होता एक पाकिस्तान

अहमदाबाद। गुजरात चुनावों में सरदार पटेल का नाम कई बार लिया गया। ऐसा हो भी क्यों न, क्योंकि पटेल ने गृहमंत्री रहते कई ऐसे मसले सुलझाए थे, जो आज भी नजीर हैं। ऐसे ही एक किस्सा के बारे में हम यहां बताएंगे। तब वक्त रहते पटेल ने सख्त कदम न उठाया हो तो शायद आज देश के बीचों-बीच एक पाकिस्तान होता।यह किस्सा इस बात से भी जुड़ा है कि आखिर भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी कैसे बना। 1 नवंबर 1956 को राज्यों के पुनर्गठन के बाद जब नया मध्यप्रदेश बना तो राजधानी किस शहर को बनाया जाए, इसे लेकर काफी जद्दोजहद हुई। इंदौर और ग्वालियर मध्यभारत के दो ताकतवर नगर थे और इनका दावा बहुत मजबूत था। मगर उस दौर के कद्दावर नेता रविशंकर शुक्ल के चलते रायपुर भी तगड़ा दावेदार बन गया। इन सबके बीच जबलपुर का दावा सबसे ऊपर था। तब देश में नए राज्यों को गठित कर रहे राज्य पुनर्गठन आयोग ने भी अपनी सिफारिशों में जबलपुर का नाम प्रस्तावित किया। उसी दौर में संत विनोबा भावे ने जबलपुर को संस्कारधानी की उपमा दी थी। इन सब वजहों से तय लग रहा था कि जबलपुर राजधानी बन जाएगा। मगर एक फैसले ने सारे समीकरण पलट दिए और भोपाल को राजधानी बना दिया गया। दरअसल, पाकिस्तान के गठन के बाद केंद्र सरकार को भोपाल के नवाब हमीदुल्ला खां पर शक था। दिल्ली की सरकार देश के दिल यानी मध्यप्रदेश में पाकिस्तानी गतिविधियों का कोई केंद्र सक्रिय नहीं देखना चाहती थी।