सही दिशा निर्देश दिलाती है कामयाबी

इग्जाम, इग्जाम और बस इग्जाम… चाहे कोई भी उम्र क्यों ना हो लेकिन इग्जाम का डर हर किसी को ही रहता है। चाहे वे इग्जाम स्कूल का हो या फिर किसी सिविल सर्विस का। अधिकांश सभी का कहना होता है कि इतना सारा काम होता है कि समय ही नहीं होता कि किताब उठा सकें या फिर कई व्यक्तियों को अपने ऊपर विश्वास ही नहीं होता कि वे परीक्षा उत्तीर्ण भी कर पाएगें या नहीं। इसलिए तैयारी करने से उपरान्त कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है जिसके माध्यम से परीक्षा का रास्ता तय करना आसान हो जाए। समय निकालना पड़ता है वक्त निकालना आसान काम नहीं है लेकिन कुछ पाने के लिए कुछ कर्मों का करना भी जरूरी है। अधिकांश युवाओं के दिमाग में घंटों बैठकर पढ़ाई करना, किताबों में गड़े रहना, हर क्षेत्र में जागरूक रहने की तस्वीर उभरती रहती है। सबके दिमाग में यही चलता है कि पढ़ाई करने के लिए तो दिन भर केवल पढ़ाई करेंगे और किताबों को देखते रहेंगे तभी जाकर कोई सफलता प्राप्त कर सकता है। ऐसा सोचकर ही कई युवाओं को इग्जाम फीवर हो जाता है और वे परीक्षा देने के ख्याल से ही घबराने लगते हैं। यह मानसिकता व सोच दोनों ही गलत हैं।
यदि कोई सही ढ़ंग से प्लानिंग करे और अपने समय का सदुपयोग करें तो बखूबी परीक्षा में सफलता प्राप्त हो सकेगी। इसके लिए कुछ दिशा निर्देशों का पालन कर आप अपना यह सपना जरूर पूरा कर सकते हैं। खुद पर यकीन जरूरी जब भी आप पढ़ाई के बारे में सोचते हैं तो आप के दिमाग में घंटों किताबों से चिपके रहने की छवि सामने आती है।
अगर आप जबरदस्ती ऐसा करना भी चाहें तो भी आप को निराश के अलावा कुछ भी हाथ नहीं लगेगा। वैसे भी पढ़ाई कर रहे होते है तो आपको सभी विषयों को लेकर चलना पड़ता है। ऐसे में तालमेल बैठकर पडने के बारे में सोचना ओर भी कठिन हो जाता हैं। ऐसे में आप निराश न हों और न ही इसके लिए अपराधग्रस्त महसूस करें। अब आप ऐसे में अपने समय के एक-एक सेकंड को भी अच्छी तरह से इस्तेमाल करें।
अपनी समय सारिणी को सुधारें। अगर आप रात में दस बजे से सुबह सात बजे तक सोते हैं तो अब रात में 11 बजे से सुबह 5 बजे तक ही सोएं। जितना पढ़े, मन से पढ़े आप जहां भी हैं, जैसे भी हैं, अपने समय सारिणी में से 15-20 मिनट का समय निकालते रहें व कुछ न कुछ तैयारी करते रहें। यदि आप घंटों एक साथ बैठकर नहीं पढ़ सकते तो जितना पढ़े मन से पढने की कोशिश करें। जैसे सुबह के समय प्रेक्टिकल करें चूंकि उस समय दिमाग काफी तरो-ताजा होता है और इसी प्रकार सामान्य ज्ञान के बारे में एक-एक विषय को छोटे-छोटे भागों में बांटें और धीरे-धीरे पढ़ें।
जब भी आप को थोड़ा सा समय मिले तो दुबारा किताब खोलें और पढ़ें। घर लौटने के बाद डिनर के बाद भी आप दो तीन घंटे पढ़ सकते हैं। ऐसे में, जब आप अपने समय का लेखा-जोखा करेंगे तो पाएंगे कि आप दिन में कम से कम 4-5 घंटे का समय निकाल पा रहे हैं।
नोटस बनाकर याद करें कभी-कभी पढ़ते समय कोई भी विषय या जानकारी हम पढ़ लेते हैं। याद कर लेते हैं। सवाल का जवाब, संबंधित डाटा आदि सब दिमाग में स्टोर भी कर लेते है लेकिन अगर उसे दिमाग में ही छोड़ दिया तो इसकी कोई गारंटी नहीं होगी कि मुख्य परीक्षा के समय आप उसे याद रख पाएंगे या नहीं क्यों कि दिमाग में सभी चीजें हमेशा याद नहीं रहतीं तो आप जो भी याद करते हैं उसके छोटे-छोटे नोट्स बनाते जाएं व उन्हें दोहराना न भूलें। बाद के लिए कुछ न छोड़ें बहुत सारे अभ्यर्थी पढ़ते समय कुछ विषय बाद के लिए संभालकर रख लेते हैं कि बाद में उसे पढ़ेंगे। लेकिन यकीन मानिए कि उनका बाद कभी नहीं आता क्योंकि आखिरी मिनट तक आप इतने व्यस्त होते हैं कि इनको पढने के बारे में आप भूल ही जाते हैं और वे धरे के धरे रह जाते हैं।
परीक्षा से कुछ दिन पहले आप अन्य आवश्यक चीजों को प्राथमिकता देते हैं और यह संभालकर रखी हुई सामग्री बिना पढ़े ही रखी रह जाती है। इसलिए जो चीज आप पढ़ रहे हैं उसे अधूरा न छोड़ें। उस गति में ही सब पढ़ लें। साथ ही कुछ समय के बाद उन्हें दुबारा पढ़ लें ताकि आप उसे भूले नहीं। जब भी आप पढ़ें तो आवश्यक चीजों को निशान लगा दें कि दोहराते समय वे आप को याद रह सके। पाठ्यपुस्तक बनाम इंटरनेट आजकल अधिकांश युवा पूरे दिन इंटरनेट के सामने बैठे रहते हैं। उसमें वे पढ़ते हैं। लेख पढ़ते हैं। अपनी जानकारी बढ़ाते हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि इस प्रकार वे पढ़ाई कर रहे हैं। लेकिन वे गलत होते हैं। क्योंकि अक्सर इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी से संबंधित सवाल कम आते हैं।
इसका कारण यह है कि परीक्षा पत्र तैयार करते समय यह ध्यान में रखा जाता है कि यह पूरी परीक्षा सभी भारतवासियों के लिए है और अधिकतर जनसंख्या के पास इंटरनेट का विकल्प नहीं होता है तो वे लोग किताबों से ही अपनी पढ़ाई करते हैं। ऐेसे में, किताबों व अन्य माध्यमों पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर ही ज्यादातर प्रश्र पूछे जाते हैं। साथ ही अपने पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए ही आवश्यक विषयों की पढ़ाई करें। शुरुआत में तो आप को इंटरनेट से पढ़ाई करना अच्छा लगेगा लेकिन बाद में आप को यह काम का नहीं लगेगा। आप इंटरनेट का इस्तेमाल करें लेकिन पूरी तरह से उस पर ही निर्भर न हो जाएं। अभ्यास करते रहना जरूरी आप जितना भी पढ़े, उसका अभ्यास साथ ही साथ करते भी रहें।
कहीं ऐसा ना हो कि आगे का पढने के चक्कर में पीछे का सारा भूल जाए। इसलिए जब एक एक्सासाइज पूरी हो जाए तो दूसरी को शुरू करने से पहले पहली की हुई एक्सासाइज का अभ्यास अवश्य कर लें चूंकि इससे एक तो आपकी उसकी रिविजन भी हो जाएगी और दूसरा एक पहलु दूसरे से कहीं ना कहीं जुड़ा होता है तो आपको आगे समझने में आसानी भी होती रहेगी। और फिर पीछे के सिलेबस का अच्छे से साथ ही साथ रिविजन भी होता रहेगा। यह सब बातें तभी फायदेमंद साबित हो सकती है जब आप एक बात को गांठ न बांध लें कि आप को चाहे जो भी हो, चाहे अच्छा लगे या न लगे पढ़ाई तो करनी ही हैं।
चूंकि आपके अपने सपनों को पूरा करने के लिए उसमें रूचि लेनी ही पड़ेगी। वैसे भी किसी ने ठीक ही कहा है कि जो चीज आसानी से मिल जाए उस चीज का कोई मोल नहीं करता, जिस चीज को पाने में जी-जान लग जाए उसको पाने का सुख ही अलग होता है और अगर पाने की चाह सच्ची हो तो वो शाहरूख खां की फिल्म ओम शांति ओम का डायलॉग याद है कि अगर पाने की चाह सच्ची हो तो पूरी कायनात उसे पूरा करने में हमारी मदद करती है। इसलिए किसी तरह का बहाना बनाना यानि अपने सपनों व लक्ष्यों को ना पाने की निशानी है।