सिरसा में लड़कियों का शारीरिक तो श्रीगंगानगर में मानसिक शोषण

– श्रीगंगानगर में सालों से कन्या लोहड़ी पैकेज के नाम पर सिर्फ सब्जबाग
– गंगानगर के ‘गुरमीतों’ पर नहीं शासन-प्रशासन का ध्यान
श्रीगंगानगर। सिरसा के डेरा सच्चा सौदा में गुरमीत राम रहीम लड़कियों का शारीरिक शोषण करता था तो श्रीगंगानगर में लड़कियों का मानसिक शोषण किया जा रहा है। मानसिक शोषण का यह सिलसिला एक दशक से भी अधिक समय से चल रहा है। इस बारे में विभिन्न स्तर पर शिकायतें भी हुई हैं लेकिन जिला प्रशासन, पुलिस और श्रम विभाग के अधिकारी जांच के काम को सिरे चढ़ाने में रुचि नहीं ले रहे। शासन प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक ने इसे हल्के मं लेकर आंखे मूंद रखी हैं।
लड़कियों का यह मानसिक शोषण कन्या लोहड़ी के नाम पर किया जा रहा है। हर साल करोड़ों रुपए के शिक्षा पैकेज देने का ढिंढोरा पीटकर कन्याओं में एक उम्मीद जगाई जाती है। बड़ी तादाद में लड़कियां उज्ज्वल भविष्य के सपने देखते हुए स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करती हैं लेकिन हर बार उनके सपने चकनाचूर हो जाते हैं। शिक्षा पैकेज के नाम पर लॉटरी निकालने का दिखावा तो किया जाता है मगर असल में कितनी लड़कियों को पढऩे मेें सहायता मिली और कितनी को नहीं, इस बारे में कोई नहीं जानता।
हर बार कन्या लोहड़ी पैकेजों का प्रचार होता है तो लड़कियों की उम्मीदें परवान चढऩे लगती हैं पर आखिर में उन्हें कुछ मिलता है तो वह है मानसिक तनाव। सब कुछ शासन और प्रशासन के सामने है लेकिन महिला सशक्तीकरण के नाम पर हो रही इस नौटंकी पर लगाम लगाने के लिए कोई कुछ नहीं करता।
बंशीधर जिंदल के नेतृत्व में चैम्बर ऑफ कॉमर्स की ओर से कन्या लोहड़ी के नाम पर सब्जबाग दिखाने, चंदा वसूली करने और वास्तव में किसी कन्या को लाभ नहीं देने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे एवं विभिन्न आला अधिकारियों को पत्र लिखे गए हैं। उच्च स्तर से जांच के आदेश दिए गए, लेकिन कोई भी इस मुद्दे पर गम्भीर नहीं दिख रहा।
जिला प्रशासन के आदेश पर अतिरिक्त जिला कलक्टर ने शिकायतकर्ता विष्णु अग्रवाल के बयान लिए। पुलिस उप अधीक्षक (शहर) ने जांच शुरू करने का ऐलान किया। विभिन्न स्कूलों से जानकारी मांगी। श्रम विभाग के उप आयुक्त ने भी जांच शुरू करने की बात कही मगर कई महीने बीतने पर भी किसी भी जांच का परिणाम सामने नहीं आया है। शिकायतकर्ता कई बार संबंधित अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट चुका है। उसे समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर किसके दबाव में जांच का काम सिरे नहीं चढ़ाया जा रहा है। जबकि कोई अंधा भी बता सकता है कि मामले में लीपापोती के सिवा कुछ नहीं हो रहा।
हैरानी की बात है कि छोटी-छोटी बातों को लेकर हुड़दंग मचाने वाले राजनीतिक दल और समाजसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी होठ सिए हुए हैं। किसी ने कन्याओं के साथ छल करने वालों के खिलाफ आवाज बुलंद नहीं की है।
इस खामोशी का मतलब : कन्या लोहड़ी के नाम पर छलावा किया जा रहा है, यह बात सभी लोग जानते हैं, लेकिन एक अजीब सी खामोशी धारण किये हुए हैं। न पीडि़त बोल रहे हैं और न शहर के लोग। शीशे की तरह यह बात साफ है कि जिन शिक्षण संस्थाओं के नाम शिक्षा पैकेज देने के लिए प्रचारित प्रसारित किये गये हैं उन्होंने जब सिरे से ही ऐसे पैकेज देने से मना कर दिया तो इसमें संशय कहां रह गया?
बड़ा सवाल यह है कि चैम्बर ऑफ कॉमर्स के पास आज तक यह नहीं बता पाया है कि कितने आवेदन आये, कितनी कन्याओं को शिक्षा पैकेज दिया है तो उसकी सूची कहां है? कुल कितने आवेदन आये? ऐसे अनेक सवाल साफ नजर आ रहे हैं कि इनका कोई जवाब चैम्बर के पास नहीं है तो शासन-प्रशासन क्यों चुप्पी साधे हुए है। जांच के नाम पर लीपापोती की जा रही है।
ऐसे ही बनते हैं गुरमीत राम रहीम: गुरमीत राम रहीम आसमान से उतरकर नहीं आते, उन्हें देश के लोग ही बनाते हैं, बढ़ावा देते हैं और अन्याय के खिलाफ नहीं बोलने वाले लोगों की वजह से ऐसे गुरमीतों के हौंसले बढ़ते हैं। हर आदमी जब ये सोच ले कि मुझे क्या पड़ी है तो महिलाओं का शोषण तो होना ही है। वो भले ही सिरसा डेरे को लेकर हो या गंगानगर में शिक्षा पैकेज के नाम पर कन्याओं को भ्रमित करने का मामला हो।