सीवी और रिज्यूमे में होता क्या है अंतर?

नौकरी के इंटरव्यू के लिए जाना हो तो आपका रिज्यूमे बहुत महत्वपूर्ण होता है। लेकिन कई बार कैंडिडेट्स रिज्यूमे, सीवी और बायोडाटा में अंतर नहीं समझ पाते और छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं। इसलिए आपको यह पता होना चाहिए कि जिस जॉब के लिए आप अप्लाई कर रहे हैं उन्होंने कैंडिडेट्स से इन तीनों में से क्या मांगा है।
अगर आपसे रिज्यूमे सबमिट करने के लिए कहा जाए तो आपको यह पता होना चाहिए कि उसमें क्या महत्वपूर्ण बातें होती है। रिज्यूमें में आप अपनी एजुकेशनल क्वॉलिफकिेशन और अपने स्किल्स की काफी शॉर्ट में जानकारी देते हैं। वहीं सीवी में यह जानकारियां डिटेल में देनी होती है। बायोडाटा में आप पर्सनल जानकारी देते हैं।
सीवी, रिज्यूमे और बॉयोडाटा को लेकर कंफ्यूजन में हैं तो यहां अंतर समझएि:
रिज्यूमे: किसी भी नौकरी के लिए भेजे गए रिज्यूमे को सरसरी निगाह से देखा जाता है। इसलिए इसमें जो भी लिखा जाता है शॉर्ट में लिखा जाता है और उस इंफोर्मेशन का जिक्र किया जाता है जो बेहद जरूरी हो। एक तरह से रिज्यूमे में आपको नौकरी के लिए इंटरव्यू तक ले जाने का रास्ता है। वहीं सीवी को आपके इंटरव्यू के दौरान देखा जाता है। इसलिए रिज्यूमे की शुरू में ही अपने स्किल्स के साथ-साथ अपने क्षेत्र से जुड़ी स्पेशलाइजेशन का भी जिक्र करें। इससे रिक्रूटर को पता चलेगा कि आपका इंडस्ट्री में कितना अनुभव है। यह एक या दो पेज का होता है और जरूर नहीं कि आप रिज्यूमें में हर जॉब, हर अवार्ड का जिक्र करें। इसका सबसे बड़ा अंतर ये भी है कि आप हर जॉब के हिसाब से इसे कस्टमाइज कर सकते हैं।
सीवी : Curriculum Vitae एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ है कोर्स ऑफ लाइफ। यह रिज्यूमे से ज्यादा डिटेल में होता है, 2 से 3 पेज का। सीवी में आपकी अब तक कि सारी स्किल्स की लिस्ट, सभी जॉब्स और पॉजिशंस, डिग्री, प्रोफेशनल डिग्री का जिक्र होता है। इसमें आप अपने पास्ट की उन चुनौतियों के बारे में लिख सकते हैं जिनका आपने सफलतापूर्वक सामना किया है। आपको बता दें कि रिक्रूटर हमेशा उन कैंडिडेट्स को पसंद करते हैं, जो लीक से हट कर सोचते हैं। सीवी अकसर उन कैंडिडेट्स के लिए सही रहता है जो फ्रेशर हैं या फिर वो करियर बदलना चाहते हों।
बायोडाटा: बायोडाटा की फुल फॉर्म होती है बॉयोग्राफिकल डाटा। बायोडाटा में पर्सनल इंफोर्मेशन लिखी जाती है जैसे मैरिटल स्टेटस, डेट ऑफ बर्थ, धर्म, जेंडर का जिक्र किया जाता है। भारत में बॉयोडाटा का इस्तेमाल अकसर शादी से पहले पर्सनल इंफोर्मेशन देने के मकसद से भी किया जाता है। जॉब के लिए इसका इस्तेमाल तब होता है जब कैंडिडेट्स सरकारी नौकरी के लिए आवेदन कर रहे होते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जहां कैंडिडेट्स की पर्सनल इंफोर्मेशन जैसे धर्म, उम्र, जेंडर को बताना जरूरी नहीं होता, वहां बॉयोडाटा का इस्तेमाल नहीं किया जाता।