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‘हिंदी मीडियम’

बॉलीवुड फिल्म ‘हिंदी मीडियम’ आज सिनेमाघरो में रिलीज हो रही है। इस देश में अंग्रेजी सिर्फ जुबान नहीं क्लास है’।’ ये हर हिंदी भाषा के दिल का दर्द है जो अपने छोटे शहर से निकलकर कुछ बनना चाहता है। आप भले ही हिंदी में काम कर रहे हों लेकिन ईमेल से लेकर इंटरव्यू तक सब कुछ अंग्रेजी में होता है। ऐसे ही हम और आप में से किसी एक पैरेंट्स की कहानी आज रिलीज हुई फिल्म ‘हिंदी मीडियम’ में बड़े ही इंटरटेनिंग अंदाज में दिखाई गई है।
ये कहानी पुरानी दिल्ली में रहने वाले राज बत्रा की है जिसका अपना गारमेंट्स का शो रूम है। राज खुद हिंदी बोलता है। उसकी बीवी मीता अंग्रेजी मीडियम से पढ़ी है और चाहती है कि उसकी बेटी पिया को कभी किसी बात की परेशानी ना हो इसलिए वो अंग्रेजी मीडियम में पढ़े। इसके लिए राज और मीता को पहले खुद अपनी बोली और अपना लाइफस्टाइल सुधारना पड़ता है क्योंकि दिल्ली में सिर्फ बच्चों के टैलेंट पर नहीं बल्कि पैरेंट्स के इंटरव्यू के बाद ही एडमिशन मिलता है। जब ऐसे बात नहीं बनती है तब वो गरीब कोटा से एडमिशन लेने की ठानते हैं और गरीब बनने का ढ़ोंग करते हैं।उनकी मुलाकात श्याम प्रकाश से होती है जो खुद अपने बेटे को गरीब कोटा से एडमिशन दिलाना चाहता है।
राज की बेटी को एडमिशन तो मिल जाता है लेकिन जब उसे पता चलता है कि उसने अपने ही दोस्त श्याम के बच्चे का हक छीन लिया है तो उसे अपनी गलती का एहसास होता है। लेकिन क्या वो अपनी गलती सुधारने के लिए कुछ करता है? छोटे स्कूल के बच्चे भी उतने ही टैलेंटेड होते हैं जितने की अमीर बच्चेज् ये साबित करने के लिए राज क्या करता है? क्या उसकी वजह से अमीर लोगों की सोच बदल पाएगी? यही फिल्म का क्लाइमैक्स है।