हुनर है पर पहचान नहीं?

हुनर तो सबमें होता है, बस जरूरत उसे पहचानकर, उसे मांजकर उसके अनुसार करियर बनाने की होती है। आप इस दिशा में कहां तक पहुंच पाए हैं? काउंसलिंग के दौरान अक्सर इस तरह के पत्र और ई-मेल आते हैं कि मैंने इस ब्रांच में प्रोफेशनल कोर्स किया है, लेकिन अनुभव न होने के कारण कोई काम या नौकरी नहीं मिल रही। या फिर यह कि मैं एग्जाम में नंबर तो ज्यादा लाना चाहता हूं, लेकिन पढ़ाई में मन नहीं लगता। अगर ऐसे पत्र लिखने वालों के मन में झांकने का प्रयास करें, तो यही लगता है कि ये लोग बेशक अपनी नजरों में खुद को कमजोर पा रहे हों, लेकिन इनमें अपनी पहचान की जिजीविषा जरूर है।
उनके भीतर कहीं-न-कहीं अपनी पहचान बनाने की बेचैनी नजर आती है। अगर ऐसा नहीं होता, तो शायद वे ज्यादा नंबर या अच्छी नौकरी पाने के लिए बेचैन नहीं होते। इनमें से अधिकतर के सपने इसलिए पूरे नहीं हो पाते क्योंकि ज्यादातर को अपने भीतर छिपे हुनर का पता ही नहीं होता। हुनर को जानें आप आगे निकलना चाहते हैं, तो आपको सबसे पहले अपने भीतर छुपे हुनर को खोज निकालना होगा।
याद रखें, इस संसार में कोई भी इंसान ऐसा नहीं है, जिसके भीतर कोई-न-कोई गुण न हो। इसलिए यह हीन भावना अपने भीतर से निकाल दें कि आपको कुछ नहीं आता। दूसरों के बुरा-भला कहने की परवाह करने के बजाए इस बात की परवाह और एनालिसिस करें कि आखिर आपकी वह कौन-सी खराबी है, जो उन्हें रास नहीं आती। ईमानदारी से करें प्रयास कमजोरियों को दूर करने के बाद समुचित रणनीति के साथ अपनी मंजिल की दिशा में ईमानदारी से कदम बढ़ाएं। आलस्य से दूर रहें। मन में बिठा लें कि किसी भी तरह लक्ष्य को हासिल करना ही है, चाहे इसके लिए कितनी भी मेहनत क्यों न करनी पड़े।
आप जो भी काम कर रहे हैं, उसे पूरे उत्साह के साथ करें। उत्साह होने पर कोई भी काम मुश्किल नहीं लगेगा। चलें वक्त के साथ आप जो भी कोर्स कर रहे हैं, अगर उसमें मन नहीं लग रहा, तो समय रहते उसे बदल लें। अगर यह संभव नहीं है, तो इस बात पर विचार करें कि कैसे उसी में मन लगा सकते हैं, ताकि बेहतर परिणाम हासिल कर सकें। इसके अलावा, अगर कॉलेज या संस्थान इंडस्ट्री की आवश्यकता के अनुसार जरूरी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर ध्यान नहीं दे रहा, तो खुद की पहल से ऐसी ट्रेनिंग हासिल करने का प्रयास करें।