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3 वर्ष से अधिक नहीं होगा किसी भी विभागाध्यक्ष का कार्यकाल-ष्टरू मनोहर लाल

चंडीगढ़। हरियाणा में किसी भी विभागाध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्ष से अधिक का नहीं होगा और कुछ महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति आयु के बाद कुछ शर्तों के साथ सेवा विस्तार दिया जाएगा। इस संबंध में मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में विभागाध्यक्षों का कार्यकाल निर्धारित करने और कर्मचारियों एवं अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु के मामले की जांच के लिए गठित कैबिनेट उप-समिति की सिफारिशों को स्वीकृति प्रदान की गई। समिति की सिफारिश के अनुसार, सेवानिवृत्ति की आयु के बाद रि-इम्पलायमेंट केवल कानून और व्यवस्था, नियामक कार्य, प्रशासनिक महत्व के कार्य, बुनियादी ढांचे के विकास और बुनियादी सार्वजनिक सेवा से जुड़े विभागों में लागू होगी। प्रशासनिक विभाग उन अधिकारियों के स्तर और वर्ग का आकलन करेगा जिनकी सेवाओं को नियमित सेवानिवृत्ति की आयु के बाद बनाए रखे जाने की आवश्यकता है। इस तरह के प्रस्ताव को हरियाणा के मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। प्रशासनिक विभाग एक्सटेंशन के फैसले पर पहुंचने के लिए मानदंडों का पालन करेगा। विभाग कर्मचारियों एवं अधिकारियों के उन वर्गों या श्रेणियों की पहचान करेगा जिनकी सेवाएं कनिष्ठ एवं अन्य कर्मचारियों के पदोन्नति अवसरों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना संगठन के उद्देश्यों और लक्ष्यों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक हैं। एक्सटेंशन केवल तभी दी जाएगी जब कम से कम दो वर्ष के लिए फीडर पद से पदोन्नति पद के लिए पात्र उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होंगे। अच्छा सेवा रिकॉर्ड के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा और अधिकांश एसीआर गुड या प्लस होनी चाहिए और कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित नहीं होनी चाहिए। समिति ने यह भी सिफारिश की है कि विभागाध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्ष से अधिक नहीं होना चाहिए। इस संबंध में संबंधित सेवा नियमों में प्रावधान किया जाना चाहिए। तीन वर्षों के बाद अधिकारियों एवं कर्मचारियों के संबंध में कार्य का पुन: आवंटन किया जाएगा और पदोन्नत अधिकारी पद ग्रहण कर लेगा।