40+ पुरुषों को कभी नहीं भूलना चाहिए ये बातें

40 की उम्र का पड़ाव कुछ ऐसा ही कि आपको कुछ चीजों में विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। यह उम्र कई जिम्मेदारियों से भरी है। अगर आपने कुछ ध्यान नहीं दिया तो काफी तकलीफें हो सकती है। इसलिए अपने इस उम्र के पड़ाव में कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
कॉन्फीडेंस और एरोगेंस
कॉन्फीडेंस और एरोगेंस के बीच में एक लाइन का फासला होता है। जब इंसान 40 की उम्र में पहुंचता है तो उसे इस लाइन का अंदाजा हो जाता है।
नॉलेज और विजडम
बुद्धिमानी शिक्षा और अनुभव का मिला हुआ रूप होती है। नॉलेज इसान को शिक्षा से आती है। इसके बीच का फासला भी उम्र के इस पड़ाव में पहुंचने के बाद ही पजा चलता है।
हमेशा सीखते रहना
इंसान को हमेशा सीखते रहना चाहिए। हर रोज कुछ नया सीखने की चाहत उसे औरों से अलग करती है। 40 की उम्र में पहुंचने के बाद आप में ये हुनर आता है।
मेस्टो स्टेटस
जब व्यक्ति 40 की उम्र में पहुंचता है तब वो खुद को एक नए पड़ाव पर खड़ा पाता है। नई उम्र के लोग उससे सलाह लेने के लिए आते हैं।
नर्वस
जब व्यक्ति 40 की उम्र पार करता है उस समय वो खुद को नर्वस होने से रोकने में सक्षम होता है। कुछ ऐसे क्षण आते हैं जहां वो खुद को संभाल लेता है।
क्या जरूरी है
40 की उम्र के इस पड़ाव में पहुंचने के बाद ही व्यक्ति को ये समझ में आता है कि उसके लिए क्या जरूरी है। परिवार और अपनो की अहमियत उसे उम्र के इस पड़ाव में पता चलती है।
कब चुप रहना है
जब व्यक्ति इस उम्र में पहुंचता है तो उसे काफी अनुभव हो चुका होता है। कब बोलना है कहां बोलना है कितना बोलना है उसे पता होता है।
परिवार सबसे पहले
किसी भी इंसान के लिए परिवार उसकी प्राथमिकता होती है। उम्र के इस पडा़व में व्यक्ति को फैमिली की चाह होती है। उसे अपनो की परवाह होती है।
दोस्त
उम्र के इस पड़ाव को पार करने के दौरान जो आप के दोस्त बनते हैं वो हमेशा आप के साथ रहते हैं। स्कूल और कॉलेज के दोस्त समय के साथ छूट जाते हैं।
व्यवहार
एक महिला के साथ किस तरीके से पेश आना चाहिए एक व्यक्ति उम्र के इस पड़ाव में आने के बाद ही जान पाता है। किस महिला से कैसे बर्ताव करना है ये उम्र का अनुभव बाताता है।