वैवाहिक आयोजन हो या कोई अन्य निजी कार्यक्रम, ऐसी जगहों पर भी आजकल चाय, कॉफी, सूप, जूस, आइसक्रीम जैसी पीने-खाने की चीजों के लिए पेपर-कप को खूब पसंद किया जा रहा है। ये कप देखने में आकर्षक तो लगते ही हैं, ईको-फ्रैंडली होने के कारण पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक नहीं होते। स्वास्थ्य के लिहाज ..." />
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कम पूंजी में शुरू करें ये बिजनेस

वैवाहिक आयोजन हो या कोई अन्य निजी कार्यक्रम, ऐसी जगहों पर भी आजकल चाय, कॉफी, सूप, जूस, आइसक्रीम जैसी पीने-खाने की चीजों के लिए पेपर-कप को खूब पसंद किया जा रहा है। ये कप देखने में आकर्षक तो लगते ही हैं, ईको-फ्रैंडली होने के कारण पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक नहीं होते। स्वास्थ्य के लिहाज से भी ये हाइजीनिक हैं। पेपर-कप चूंकि कागज के बने होते हैं, इसलिए ठंडा-गरम कोई भी पेय पदार्थ पीने के लिए उपयुक्त होते हैं। यही कारण है कि इन दिनों प्लास्टिक उत्पादों पर रोक और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते कागज से बने उत्पादों का बाजार हर जगह तेजी से बढ़ रहा है। पेपर-कप मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस कैसे शुरू किया जा सकता है, इसके लिए कितनी लागत, मैनपावर और किस तरह की स्किल की जरूरत होती है, आइए जानते हैं इन सभी के बारे में।
कारोबार की संभावनाएं
पेपर-कप की लोकप्रियता इन दिनों दुनिया भर में है। चूंकि कागज के बने कप ईको-फ्रैंडली होते हैं और इनसे संक्रमण फैलने का भी कोई खतरा नहीं होता, इसलिए आजकल तमाम आईटी कंपनियों, शैक्षणिक संस्थानों, कैंटीन, रेस्तरां, कॉफी-टी शॉप, फास्ट फूड शॉप आदि जैसी जगहों पर इनका रोजाना खूब इस्तेमाल हो रहा है। अब तो शादी समारोह तथा अन्य निजी कार्यक्रमों में भी ऐसे कप खूब पसंद किए जा रहे हैं।
पेपर-कप का मार्केट आज हर तरह के शहरों-कस्बों-गांवों में है, जहां इनकी बिक्री करना भी आसान है। इनकी आपूर्ति केटरर के जरिए भी की जा सकती है। बिजनेस और प्रोडक्शन बढऩे पर फास्ट फूड व सॉफ्ट ड्रिंक्स की बड़ी कंपनियों, होटल-रेस्तरां आदि से भी जुड़ सकते हैं। स्ट्रीट टी-कॉफी स्टॉल को भी इनकी सप्लाई की जा सकती है। पेपर प्रोडक्ट का घरेलू इस्तेमाल भी काफी बढ़ रहा है। वर्ष 2020 तक देश में पेपर प्रोडक्ट्स की खपत करीब 53 प्रतिशत तक बढऩे की उम्मीद है।
लागत व संसाधन
पेपर-कप मैन्युफैक्चरिंग के लिए महज 1 हजार वर्गफीट की जगह चाहिए। इतनी जगह में आप दो मशीनें लगा सकते हैं। शुरुआत एक मशीन से भी की जा सकती है। मशीन का खर्च साढ़े 6 से साढ़े 7 लाख रुपए तक आएगा। इससे प्रतिदिन 12 घंटे की एक शिफ्ट में 25 से 30 हजार कप तैयार किए जा सकते हैं। इस तरह दो शिफ्ट में कुल 50 से 60 हजार छोटे-बड़े आकार के कप-ग्लास आसानी से तैयार किए जा सकते हैं। मशीन के संचालन के लिए एक शिफ्ट में दो कर्मचारी चाहिए, यानी 12-12 घंटे की दो शिफ्ट के लिए कुल चार लोग।
कच्चा माल
पेपर-कप के निर्माण की पूरी प्रक्रिया कागजों की खरीददारी, प्रिंटिंग, कटाई, कप के निर्माण, पैकेजिंग और स्टोरेज के रूप में कई चरणों से होकर गुजरती है। आम तौर पर किसी भी पेपर-कप मशीन से आप आइसक्रीम कप, कॉफी कप और जूस ग्लास अलग-अलग आकार में तैयार कर सकते हैं। पेपर-कप्स को बनाने के लिए प्रिंटेड कागज, बॉटम रील और पैकिंग मटेरियल की जरूरत होती है। बाजार में विभिन्न कंपनियों के प्रिंटेड कागज उपलब्ध हैं। चाहें, तो आप कटा हुआ तैयार कागज खरीद सकते हैं या फिर कटिंग मशीन लगाकर इन्हें खुद भी तैयार कर सकते हैं।
जरूरी ट्रेनिंग
पेपर-कप के निर्माण के लिए बहुत ज्यादा प्रशिक्षण की जरूरत नहीं होती। मशीन खरीदने पर कंपनियां खुद इसके संचालन की शुरुआती बेसिक ट्रेनिंग देती हैं। अगर किसी व्यक्ति ने आईटीआई से प्रशिक्षण ले रखा है, तो वह भी इन मशीनों का संचालन आसानी से कर सकता है। इसके अलावा, मार्केट में टेक्निकल सपोर्ट की भी सुविधा उपलब्ध है।
बैंकों से लोन की सुविधा
खुद का बिजनेस शुरू करने के लिए इन दिनों बैंकों के जरिए कई सरकारी ऋण योजनाएं चल रही हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (तरुण) के तहत भी युवाओं को 50 हजार से लेकर 10 लाख रुपए तक का लोन दिया जाता है। इस लोन पर 25 प्रतिशत तक की छूट भी है। महिला एंटरप्रेन्योर्स को ऋण लेने पर और भी ज्यादा छूट की सुविधा है। इसी तरह सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम मंत्रालय टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन के लिए सीएलसीएसएस स्कीम के तहत 15 लाख तक का ऋण लोगों को मुहैया करा रहा है। इस ऋण पर भी 15 प्रतिशत की छूट दी जाती है।

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