भारत को मसालों का देश कहा जाता है। खाने में बहुतायत से प्रयोग होने वाले मसाले जैसे काली मिर्च, धनिया, लौंग, दालचीनी, गरम मसाला महज हमारे खाने को सुगंधित और लजीज ही नहीं बनाते बल्कि सेहत को भी दुरुस्त रखते हैं। आज हम आपको मसालों के फायदे के बारे में बता रहे हैं। क्यों बेहतर ..." />

स्वाद नहीं सेहत भी बनाते हैं मसाले

भारत को मसालों का देश कहा जाता है। खाने में बहुतायत से प्रयोग होने वाले मसाले जैसे काली मिर्च, धनिया, लौंग, दालचीनी, गरम मसाला महज हमारे खाने को सुगंधित और लजीज ही नहीं बनाते बल्कि सेहत को भी दुरुस्त रखते हैं। आज हम आपको मसालों के फायदे के बारे में बता रहे हैं।
क्यों बेहतर हैं मसाले
प्राकृतिक रूप से तैयार मसाले केवल खाने को स्वादिष्ट ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाते हैं। लाल मिर्च को छोड़ दें तो मसालों में एंटी-आक्सीडेंट्स और कैंसररोधी तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
इलायची
भारत समेत दुनिया भर में खाने में इलायची का इस्तेमाल होता है। इलायची में पाया जाने वाला तेल पाचन को बेहतर रखने में मददगार होता है।
दालचीनी
खाने के अलावा दालचीनी का टूथपेस्ट, माउथवाश और च्वुइंगम में भी प्रयोग होता है। दालचीनी में पाए जाने वाले यूजेनाल और सिनेमेल्डीहाइड दर्दनिवारक की तरह काम करते हैं। दालचीनी खून का बहाव और थक्का जमने की प्रक्रिया ठीक रखती है और जलन को दूर करती है। इसके अलावा दालचीनी डायबिटीज के इलाज में भी कारगर है।
लौंग
आमतौर पर खाने को सुगंधित बनाने के लिए लौंग का इस्तेमाल होता है। दांत का दर्द दूर करने में लौंग के तेल को शर्तिया इलाज माना जाता है। इसके अलावा लौंग में पाया जाने वाला यूजेनाल जलन व आर्थराइटिस (जोड़ों की बीमारी) के दर्द से निजात दिलाता है।
जीरा
दाल बघारने या चावल फ्राई करने में इस्तेमाल होने वाला जीरा पाचन ठीक रखने के साथ सूजन दूर करने में मददगार साबित होता है। खून साफ रखने में भी जीरा अहम भूमिका निभाता है।
कुछ और भी जानिए
अनसफल (स्टार एनाइस) र्यूमेटिज्म (जोड़ों व टिश्यू की परेशानी) को दूर करने में कारगर है।
तेज पत्ते में एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं।
एंटी-आक्सीडेंट्स की तरह प्रयुक्त होने वाला लहसुन हृदयरोगियों खासकर कोरोनरी आर्टरी (धमनी) के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद है।
सर्दी-जुकाम और बुखार को दूर करने में तुलसी का कोई जवाब नहीं।
एंटीसेप्टिक की तरह प्रयुक्त होने वाली हल्दी अल्जाइमर्स (भूलने की बीमारी) रोकने में भी मददगार होती है।
काली मिर्च पाचन और भूख बढ़ाती है। वहीं राई (सरसों) में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड्स, लोहा, जिंक, मैंगनीज, कैल्शियम और प्रोटीन शरीर के लिए काफी जरूरी हैं।

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