Movie Review: ‘राब्ता’

पुनर्जन्म को लेकर भारतीय समाज में बड़ा कौतुहल रहता है। पुनर्जन्म के कितने किस्से हमें अनायास ही सुनने को मिल जाते हैं। शायद यही वजह है कि पुनर्जन्म हमेशा से बॉलीवुड को लुभाता रहा है। ज्यादा पीछे न जाएं तो भी हाल के कुछ वर्षों में इस विषय पर कुछ फिल्में बनी हैं, मसलन- शाहिद कपूर व प्रियंका चोपड़ा स्टारर ‘तेरी मेरी कहानी’ और सनी लियोने स्टार ‘एक पहेली लीला’। यह ऐसा विषय है, जिसे सही तरह से प्रस्तुत किया जाए तो दर्शकों से राब्ता जुड़ जाता है और अगर ठीक से न संभाला जाए तो रायता फैल जाता है। सुशांत सिंह राजपूत और कृति सैनन स्टारर ‘राब्ता’ के साथ कुछ ऐसा ही हुआ लगता है।
यह प्रसिद्ध निर्माता दिनेश विजन की बतौर निर्देशक पहली फिल्म है, जो रिलीज से पहले कई कारणों से चर्चा में रही। कभी दीपिका पादुकोण के आइटम नंबर करने की खबर की वजह से तो कभी तेलुगू फिल्म ‘मगधीरा’ से प्लॉट चोरी के आरोपों की वजहों से। हालांकि ‘मगधीरा’ के निर्माता ने प्लॉट चोरी करने के केस को ‘राब्ता’ के रिलीज से ठीक पहले वापस ले लिया, जिससे फिल्म को बहुत राहत मिली। गौरतलब है कि ‘मगधीरा’ भी पुनर्जन्म की कहानी है, लेकिन उसमें और ‘राब्ता’ में मूल फर्क यह है कि उसमें चार प्रमुख किरदारों का पुनर्जन्म था, लेकिन राब्ता में सिर्फ तीन किरदारों का पुनर्जन्म है। वहीं ‘मगधीरा’ में हीरोइन को पुनर्जन्म की याद हीरो दिलाता है, जबकि ‘राब्ता’ में उल्टा है। वैसे दोनों की कहानी का केंद्रीय विषय एक ही है।
बहरहाल बात करते हैं ‘राब्ता’ की। फिल्म अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से शुरू होती है और वहीं खत्म भी होती है। बीच की सारी कहानी हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में चलती है। शिव (सुशांत सिंह राजपुत) पेशे से बैंकर है। वह बेहद दिलफेेंक किस्म का लड़का है। लड़कियों को देखते ही उनसे फ्लर्ट करना शुरू कर देता है। वह अपने दोस्त (वरुण शर्मा) के साथ एक बैंकर्स कॉन्फ्रेंस के लिए बुडापेस्ट जाता है। वहां भी वह लड़कियों पर लाइन मारना शुरू कर देता है। अचानक उसकी मुलाकात सायरा (कृति सैनन) से होती है और उसे सायरा से प्यार हो जाता है। सायरा भी उससे प्यार करने लगती है। दोनों का प्यार बड़ी तेजी से परवान चढ़ता है और वे भविष्य की योजनाएं बनाने लगाते हैं। इसी बीच परिदृश्य में नौजवान अरबपति कारोबारी जाकिर मर्चेंट यानी जैक (जिम सार्ब) का प्रवेश होता है। एक पार्टी में जैक की मुलाकात सायरा और शिव से होती है। शिव एक हफ्ते के लिए कॉन्फ्रेंस में चला जाता है और जैक अपने चंगुल में सायरा को फंसा लेता है। फिर कहानी पिछले जन्म में पहुंचती है, जिसमें थोड़ी देर के लिए राजकुमार राव 300 साल से ज्यादा के एक मोराकी (फिल्म में दिखाई गई एक प्रकार की पुरानी जनजाति) की भूमिका में दिखते हैं।
फिल्म के तीनों मुख्य किरदारों का राब्ता पिछले जन्म से है और दोनों जन्मों में उनकी कहानी एक जैसी ही चलती है। बस पृष्ठभूमि और कालखंड को छोड़ कर। हां, दोनों जन्मों की कहानी का अंत जरूर अलग है। पहले हाफ में फिल्म थोड़ी ठीक है। सुशांत और कृति की केमिस्ट्री अच्छी लगी है। कई सीन ऐसे हैं, जो अच्छा कॉमिक प्रभाव पैदा करते हैं। लेकिन फिल्म जैसे-जैसे आगे बढ़ती जाती है, इसकी रोचकता कम होती जाती है। दूसरे हाफ में तो बहुत डल हो जाती है। खासकर पिछले जन्म की जो कहानी है, वह उबाऊ लगती है। उसमें कहीं भी स्वाभाविकता नहीं दिखती। सब कुछ बनावटी सा लगता है। गेटअप को छोड़ कर राजकुमार राव की भूमिका में कुछ भी खास नहीं लगता, जिसका इतना प्रचार किया गया था। उतना काम तो किसी से भी कराया जा सकता था।
फिल्म की रिलीज से पहले इसके निर्माताओं ने इसके एक्शन के बारे में भी काफी बातें की थीं। लेकिन एकाध दृश्यों को छोड़ दें तो एक्शन भी ऐसा नहीं है, जिसे याद रखा जा सके। यह दो जन्मों की एक प्रेम कहानी है। ऐसी कहानियों में प्यार की एक तीव्रता (इंटेंसिटी) देखने को मिलती है, लेकिन वह ‘राब्ता’ में गुम है। यह न पूर्व जन्म की कहानी में देखने को मिलती है और न ही वर्तमान जन्म की कहानी में। दिनेश विजन ने किसी भी चीज को कन्विसिंग तरीके से चित्रित नहीं किया है। उनका निर्देशन प्रभावित नहीं करता। पटकथा में बहुत सारे झोल हैं। फिल्म बिखरी-बिखरी लगती है।
सुशांत ने शिव के रूप में ठीक अभिनय किया है, हालांकि कई बार वह शाहरुख खान की नकल करते लगे हैं। वहीं जलान के रूप में वह बिल्कुल प्रभावित नहीं करते। कृति सैनन सुंदर लगी हैं, लेकिन उनका अभिनय औसत दर्जे का है, जबकि किरदार में संभावनाएं थीं। जैक सार्ब ठीक हैं, पर उनका हिंदी बोलने का लहजा किसी विदेशी की तरह लगता है। यह जैक के रोल में तो चल जाता है, लेकिन पूर्व जन्म वाले किरदार में थोड़ा खटकता है। वरुण शर्मा अपने परिचित अंदाज में है, लेकिन उनके पास करने के लिए कुछ खास था नहीं।
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत है बुडापेस्ट के कुछ खूबसूरत दृश्य। मार्टिन प्रीस ने इस यूरोपीय शहर की खूबसूरती के कुछ दृश्य बड़े खूबसूरत तरीके से अपने कैमरे में कैद किए हैं। संगीत भी ठीक है। दीपिका पादुकोण पर फिल्माया गाया टाइटल गीत ‘तुझसे है राब्ता’ भी फिल्म के राहत देने वाले पहलुओं में से एक है। वैसे कुल मिलाकर यह फिल्म अपनी ओर खींच नहीं पाती है।
रेटिंग: 2.5 स्टार