Movie Review : ‘हसीना पारकर’

एक्ट्रैस श्रद्घा कपूर की फिल्म ‘हसीना पारकर’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म की कहानी 2007 की है, जब हसीना पारकर (श्रद्धा कपूर) कोर्ट में पेशी के लिए आती हैं। पेशी के दौरान कोर्ट में महिला वकील हसीना से जिरह के दौरान उनके पिता (दधि पांडेय), पति (अंकुर भाटिया) और भाई (सिद्धांत कपूर) के बारे में सवाल पूछती है। इस पर हसीना सभी के बारे में जानकारी देती है। इसके बाद कोर्ट इस केस पर क्या फैसला सुनाती है और दाऊद का क्या होता है, ये जानने के लिए आपको थिएटर का रुख करना होगा। दाऊद के दुबई भागने के बाद उसका बहनोई इब्राहिम पारकर मुंबई में उसका कारोबार देखता था। उसकी हत्या के बाद नागपाड़ा की ‘गॉडमदर’ के नाम से फेमस हसीना पारकर ने दाऊद के कारोबार को संभाला था। फिल्म के डायरैक्टर अपूर्व लखिया का डायरैक्शन और कैमरावर्क अच्छा है। हालांकि फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले काफी कमजोर है। कहानी जिस तरह आगे बढ़ती है, वो काफी बनावटी लगता है। साथ ही घटनाएं जल्दी-जल्दी होती हैं, जिससे कन्फ्यूजन भी क्रिएट होता है। इसे आराम से दिखाया जा सकता था। फिल्म में डायलॉग पर भी उतना ध्यान नहीं दिया गया, जिससे कई बार सीरियस सीन्स में भी हंसी आ जाती है। बता दें कि श्रद्धा कपूर का काम बनावटी सा लगता है। हसीना पारकर के रोल में वो फिट नजर नहीं आतीं। उनकी डायलॉग डिलिवरी भी उतनी अच्छी नहीं है। वो इसे बेहतर कर सकती थीं। पिता के रोल में दधि पांडेय का काम काफी अच्छा है। दूसरे कलाकारों ने भी बेहतर काम किया है। कोर्ट में वकील का रोल करने वाली महिला की आवाज काफी चुभती है। इसे बेहतर किया जा सकता था। बैकग्राउंड स्कोर काफी लाउड है। फिल्म में एक गाना है, जिसकी जरूरत नहीं थी। गाने की वजह से फिल्म की रफ्तार पर भी असर पड़ता है। म्यूजिक सचिन-जिगर ने दिया है।